तख़्त श्री हरिमंदर जी पटना साहिब से सम्बंधित एक अहम पंथक दस्तावेज

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January 01, 2025

– स. गुरचरनजीत सिंघ (लांबा)

 

“गंगा में से उठी लहर गोदावरी में समाई।” ये शब्द कलगीधर पिता साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी के जीवन काल के सफ़र को बयान करते हैं। गंगा तट के कदीमी शहर पटना साहिब में सतिगुरु जी का प्रकाश हुआ और गोदावरी के तट पर श्री हजूर साहिब में ज्योति जोत समाए । पंजाब में सतलुज के किनारे आपका कर्म क्षेत्र रहा। श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी से सम्बन्धित दो तख़्त तख़्त श्री पटना साहिब और तख्त श्री हजूर साहिब, नांदेड़ पंजाब से बाहर, बिहार और महाराष्ट्र में स्थित हैं। प्रत्येक सिक्ख अपनी अरदास में इन पवित्र तख्त साहिबान को याद करता है। केवल दर्शन- दीदार के साथ ही कौमी कर्त्तव्य पूरे नहीं होते ।

अलामा इकबाल ने एक बार लिखा था, “मुल्ला को जो है हिंद में सिजदे की इजाजत नादां यह समझता है कि इसलाम है आज़ाद ।” बात केवल दर्शन- दीदार तक ही महदूद नहीं होती बल्कि कौमी अरदास का हिस्सा है, गुरुद्वारों की सेवा-संभाल का दान खालसा जी को मिले। यह माँग और विनती भी पूरी होती नजर नहीं आती।

पटना साहिब को सिक्ख पंथ का ‘पालना’ भी कहा जाता है। इस पवित्र नगरी को श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरु तेग़ बहादर जी और श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी से सम्बन्धित होने का गौरव प्राप्त है। इसी के अलावा गुरु साहिबान ने यहाँ की संगत के नाम ख़ास हुकमनामे भेज कर संगत को कृतार्थ किया। गुरु साहिब जी के पवित्र शस्त्र तथा अन्य यादचिन्ह यहाँ सुरक्षित हैं, इसलिए यहाँ का प्रबंध संभालना खालसा जी का अधिकार भी है। और कर्त्तव्य भी है।

केवल तख्त श्री पटना साहिब के प्रबंधकीय हवाले के माध्यम से बात करें तो इसका अपना बहुत पुराना इतिहास है। मौजूदा निज़ाम में यह हिंदू रिलीजिस एन्डोमेंट एक्ट के अधीन है। इसमें प्रबंधक समिति के कुल १५ सदस्य हैं। यह हाऊस चुनाव, नामजदगी और को-आप्शन के साथ पूरा होता है। इसमें मुख्य नुक्ता यह है कि चुनाव और सिक्ख संस्थाओं के माध्यम से ११ सदस्य आते हैं। अब इसमें डिस्ट्रिक्ट जज, पटना तीन सदस्य अपनी तरफ से नामजद करता है। इस प्रकार हाऊस के १४ सदस्य हो जाते हैं। अब ये १४ सदस्य मिलकर एक सदस्य को आप्ट करते हैं। इस तरह देखा जा सकता है कि प्रबंधक समिति बनाने में डिस्ट्रिक्ट जज, पटना की प्रभावशाली भूमिका होती है। इतना ही नहीं, कोई भी सदस्य चुने जाने या नामजद होने के बावजूद सदस्य तभी माना जायेगा जब डिस्ट्रिक्ट जज, पटना उसकी स्वीकृति प्रदान करेगा। इस प्रकार प्रबंध में सरकारी हस्तक्षेप की स्थापना बहुत गहरी हो जाती है। इसके अलावा भी प्रबंधक मामलों में डिस्ट्रिक्ट जज के अधिकार इसे सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त नहीं करते और प्रबंध को केवल पंथक रूप देने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

पटना साहिब के संविधान और चुनाव के नियमों को जब पढ़ा जाता है तो एक सुखद मद नजर आती है कि चुनाव में भाग लेने वाले सदस्यों तक ही नहीं, बल्कि मतदाता बनने के लिए भी अमृतधारी होना लाज़िमी है। जब कोई मद कानून का हिस्सा बन जाये तो फिर लागू करवाने वाला चाहिए, यह लागू भी हो जाती है। पटना साहिब चुनाव के दौरान पाँच धनाढ्य और आदरणीय सज्जन, जो बाद में प्रबंधक समिति में आना चाहते थे, परन्तु वे अमृतधारी होना तो दूर की बात है, पतित और तनखाहीए थे। उनके मतदाता फार्म पर बाकायदा एतराज दर्ज कर दिया गया। चुनाव आयुक्त सरदार गुरदेव सिंघ (ग्रेवाल) आईएएस थे। बाकायदा सुनवाई हुई और उनके नाम मतदाता सूची में से ही काट दिए गए। गुरुद्वारा प्रबंध में सुधार के लिए यह अति महत्वपूर्ण है।

यह सही है कि तख्त श्री हरिमंदर जी पटना साहिब के संविधान की धारा ७९ में भी स्पष्ट ढंग से अंकित किया गया है कि धार्मिक मामलों में श्री अकाल तख्त साहिब का निर्णय अंतिम है।

Dispute relating to religious matter: 79. If any dispute relating to relgious matters other than Existing Maryada, Rituals and Doctrines, of the Gurdwara arises, the Committee shall refere the same to Sri Akal Takht Sahib, Amritsar, whose opinion shall be final. This, however, will not act as bar to the filing of any regular petition in the court of the District Judge, Patna, in this connection under the Religious Endowments Act (ActXX of 1863 ) [ Article79 of Constitution and By-laws of Takhat Sri Harimandir ji, Patna Sahib]

इस धारा की व्याख्या में न जाते हुए स्पष्ट है कि धार्मिक मामलों में श्री अकाल तख्त साहिब को परामर्श देने के अधिकार के बावजूद मामला पुनः अदालतों के चक्कर में डाला जा सकता है। यह केवल अंदेशा ही नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है कि तख्त साहिब और इसके अधीन शैक्षणिक संस्थाओं के मुकद्दमे अदालतों में ले जाए जाते रहे हैं, जिससे गुरु की गोलक और सिक्ख मानसिकता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

इस पृष्टभूमि में १३ फरवरी १९७७ ई. को सिंघ साहिब जत्थेदार साधू सिंघ भौरा, जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब की अध्यक्षता में तख़्त श्री पटना साहिब में एक पंथक कनवेन्शन हुई। इसमें पटना साहिब के हॅड ग्रंथी भाई साहिब भाई मान सिंघ जी, सचखंड श्री हरिमंदर साहिब के हॅड ग्रंथी सिंघ साहिब ज्ञानी चेत सिंघ जी, संत करतार सिंघ जी तथा अन्य प्रसिद्ध हस्तियाँ शामिल हुईं और एलान किया गया कि पटना साहिब के प्रबंध में किसी भी किस्म का सरकारी दखल सहन नहीं किया जाएगा। इस अहम निर्णय की पैरवी या कार्यवाही नहीं हुई, जैसे हमारी लापरवाही की हालत है। इस पंथक कनवेन्शन के गुरमते की फ़ोटो कापी लेख के अंत में दी गई है।

इस कनवेन्शन में पारित किये गए प्रस्ताव कोई सामयिक नहीं हैं। यह एक पंथक दस्तावेज है। इसकी इबारत इस प्रकार है: १३ / २ / ७७ – जत्थेदार साधू सिंघ जी भौरा, जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब श्री अमृतसर साहिब की अध्यक्षता में हुई आज की यह कनवेन्शन बड़े ही पुरजोर शब्दों के साथ प्रकट करती है कि सिक्ख गुरुद्वारों तथा अन्य धार्मिक संस्थाओं का प्रबंध करने का अधिकार केवल कौम के प्रतिनिधियों को ही है और इसके मुताबिक तख्त श्री हरिमंदर जी पटना साहिब के प्रबंध का पूरा और निरोल अधिकार केवल सिक्खों की नुमाइंदा कमेटी को ही है। यह कनवेन्शन प्रत्येक सम्बन्धित अधिकारी को स्पष्ट तौर पर प्रकट कर देना चाहती है कि सिक्ख कौम सरकारी या किसी अन्य प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप तख्त साहिब के प्रबंध में कतई बरदाश्त नहीं करेगी और आज की यह कनवेन्शन सर्वसम्मति के साथ स्वीकार करती है कि तख़्त साहिब के मौजूदा विधान को बदले हुए समय के अनुसार इस प्रकार तरमीम किया जाये कि तख्त साहिब का प्रबंध केवल सिक्ख कौम के नुमायंदों के द्वारा ही किया जा सके और इसमें किसी किस्म का सरकारी या कोई बाहरी हस्तक्षेप होने की संभावना ही ख़त्म हो जाये। इस उद्देश्य के लिए, प्रबंधक समिति द्वारा तख्त श्री हरिमंदर जी की सभा – तारीख़ ६-२-७७ को कांस्टीट्यूशन उप समिति बनाए जाने की प्रौढ़ता की जाती है और तख्त साहिब के विधान के उपरोक्त फ़ैसले के अनुसार तरमीम के लिए अपेक्षित कार्रवाई करने के लिए उक्त समिति को पूर्ण अधिकार प्रदान किए जाते हैं।

इस कनवेन्शन में यह भी स्वीकार हुआ कि निम्नलिखित सदस्यों का एक वफद बनाया जाये :
१. स. जोगिंदर सिंघ योगी, कनवीनर
२. स. गुरचरनजीत सिंघ (लांबा)
३. स. हरसेव सिंघ धूपिया
४. स. बखशीश सिंघ ( ढिल्लों)
५. स. कर्नल डी. एस. गुमानपुरी
६. स. मौलीशवर प्रसादि सिंघ
७. स. हरचरन सिंघ (बिंदरा)
८. स. प्रीतम सिंघ (सोही)
९. स. बाबा जसवंत सिंघ

और इस वफद को अधिकार दिए गए कि इसके सदस्य डिस्ट्रिक्ट जज पटना, राज्यपाल बिहार सरकार, मुख्यमंत्री बिहार सरकार और सम्बन्धित अधिकारियों से मिल कर इस कनवेन्शन के फ़ैसले से अवगत करवाएं।