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April 14, 2026
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वैसाखि धीरनि किउ वाढीआ

वैसाखि धीरनि किउ वाढीआ जिना प्रेम बिछोहु॥ हरि साजनु पुरखु विसारि कै लगी माइआ धोहु॥ पुत्र कलत्र न संगि धना हरि अविनासी ओहु॥ पलचि पलचि सगली मुई झूठे धंधै मोहु॥ इकसु हरि के नाम बिनु अगै लई अहि खोहि॥ दयु विसारि विगुचणा प्रभ बिनु अवरु न कोइ॥ प्रीतम चरणी जो लगे तिन की निरमल सोइ॥ […]

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March 25, 2026
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केशों की महानता

दुनिया में जहां कहीं भी गुरु, पीर, फकीर, ऋषि, मुनि, साधु, संत, भक्त हुए हैं, वे सभी केशधारी, साबत सूरत वाले हुए हैं। वे अपने कर्म-व्यवसाय, नाम-सिमरन में तल्लीन तो रहते ही थे, साथ ही अपने प्राकृतिक स्वरूप की संभाल भी किया करते थे। वे केशों को नहीं काटते थे। वे सभी केशों के महत्त्व […]

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March 08, 2026
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पहाड़ों में प्रदूषण

जिस तरह से भारत के सौंदर्य स्थलों और पर्वतीय नगरों में तेजी से प्रदूषण फैल रहा है, यह बहुत ही चिंतनीय बात है। उत्तर हिमालय में धर्मशाला, डलहौजी, शिमला, कुल्लू-मनाली, अल्मोड़ा, रानीखेत और मसूरी से लेकर पूर्व में कलिंपौंग और दार्जिलिंग तक वे सभी स्थान जो हवा और स्वास्थ्यवर्धक जलवायु के लिए प्रसिद्ध थे, ये […]

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March 05, 2026
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औरन की होली मम होला

होली भारत का प्रसिद्ध, प्राचीन एवं प्रतीकमयी त्योहार है, जो देश भर में भारी उत्साह, उमंग और उल्लास से मनाया जाता है। इस त्योहार की आरंभता हिरण्यकश्यप के समय से मानी जाती है। होलिका की कुटिलता की पराजय और प्रहलाद की विजय की खुशी में लोग झूम उठे और होलिका का उपहास करना शुरू कर […]

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February 28, 2026
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जा कउ हरि रंगु लागो इसु जुग महि…

जा कउ हरि रंगु लागो इसु जुग महि सो कहीअत है सूरा ॥ आतम जिणै सगल वसि ता कै जा का सतिगुरु पूरा ॥१॥ ठाकुरु गाईए आतम रंगि॥ सरणी पावन नाम घिआवन सहजि समावन संगि ॥१॥रहाउ॥ जन के चरन वसहि मेरै हीअरै सगि पुनीता देही ॥ जन की धूरि देहु किरपा निधि नानक कै सुखु […]

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February 25, 2026
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प्राणी एको नामु धिआवहु

खाणा पीणा हसणा सउणा विसरि गइ‌आ है मरणा ॥ खसमु विसारि खुआरी कीनी धिगु जीवणु नहीं रहणा ॥१॥ प्राणी एको नामु धिआवहु ॥ अपनी पति सेती घरि जावहु ॥१॥रहाउ तुघनो सेवहि तुझु किआ देवहि मांगहि लेवहि रहहि नही ॥ तू दाता जीआ सभना का जीआ अंदरि जीउ तुही ॥२॥ गुरमुखि धिआवहि सि अम्रितु पावहि सेई […]

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February 13, 2026
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गुरबाणी शब्द विचार

कलिजुग का धरमु कहहु तुम भाई किव छूटह हम छुटकाकी ॥ हरि हरि जपु बेड़ी हरि तुलहा हरि जपिओ तरै तराकी ॥१॥ हरि जी लाज रखहु हरि जन की ॥ हरि हरि जपनु जपावहु अपना हम मागी भगति इकाकी ॥रहाउ॥ हरि के सेवक से हरि पिआरे जिन जपिओ हरि बचनाकी ॥ लेखा चित्र गुपति जो […]

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February 10, 2026
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डिठे सभे थाव नही तुधु जेहिआ

डिठे सभे थाव नही तुधु जेहिआ॥ बधोहु पुरखि बिधातै तां तू सोहिआ ॥ वसदी सघन अपार अनूप रामदास पुर ॥ हरिहां नानक कसमल जाहि नाइऐ रामदास सर ॥ (अंग १३६२) पंचम सतिगुरु श्री गुरू अरजन देव जी श्री गुरू ग्रंथ साहिब में ‘फुनहे महला ५’ के शीर्षक तले अंकित इस पावन शब्द में आत्मिक स्नान […]

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February 07, 2026
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सेवा

सेवा से तात्पर्य है कि कोई भी काम निःशुल्क रूप में करना, जिससे व्यक्ति को मानसिक संतुष्टि हो, जिसमें परोपकार की भावना हो, जिससे अपना और दूसरों का भला हो। वास्तव में सेवा एक साधना मार्ग है, जिसमें अपनी मानसिक प्रसन्नता के साथ-साथ मानवता के भले की बात होती है। सांसारिक स्तर पर उपजीविका कमाने […]

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February 04, 2026
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बनसपति मउली चड़िआ बसंतु

गुरबाणी में दिन, वार, तिथियां, ऋतुएं, महीनों का जिक्र आया है तथा इनके माध्यम से मनुष्य को आत्मिक ज्ञान प्रदान किया गया है। यहां कुदरत का वर्णन किसी प्रकार की सगुण पूजा नहीं है बल्कि कुदरत में कादर का जलवा देखकर मनुष्य की अंदरूनी विस्माद अवस्था का निरूपण किया गया है। कुदरत का आनंद मन […]