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August 25, 2025
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श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति सत्कार 

मानव मात्र के सर्वपक्षीय कल्याण हेतु अकाल पुरख परमात्मा की अपार कृपा से पंचम पातशाह श्री गुरु अरजन देव जी के महानतम संपादन के प्रयत्नों ने इस संसार के चिंतित लोगों को युग-युगांतर तक अटल रहने वाले और शबद – गुरु के रूप में सन् १६०४ ई. को लासानी ‘ग्रंथ साहिब’ का ईश्वरीय वरदान दिया, […]

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July 26, 2025
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सहयोग करें, उपकार नहीं

संसार परमात्मा की वैविध्य से परिपूर्ण रचना है। कोई शक्तिशाली, कोई निर्बल है। कोई धनवान, कोई निर्धन है। कोई ज्ञानवान है, कोई अज्ञानी है। अधिकांश धर्मग्रंथ इसे अपने कर्मों का फल मानते हैं। यह भी सत्य है कि परमात्मा दयालु है। सभी उसकी संतान हैं। अपनी संतान को कोई कैसे दुख में देख सकता है। […]

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July 18, 2025
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सिक्ख परंपरा में बाज़

बाज़ एक शिकारी पक्षी है, जिसे ‘जुर्रा की मादीन’ माना जाता है। पक्षियों की दुनिया में शक्ति और साहस का प्रतीक बाज़ चाहे अब पंजाब की धरती पर कम ही दिखाई देता है लेकिन फिर भी कहा जाता है कि सर्दियों की ॠतु में यह पंजाब की धरती पर चक्कर लगा ही जाता है और […]

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July 18, 2025
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हउमै दीरघ रोगु है दारू भी इसु माहि।।

गुरबाणी के शब्दों की व्याख्या करें तो गुरु साहिबान ने अभिमान (अहं, घमंड) को गंभीर रोग बताया है। हमारे भारतीय सभ्याचार में दार्शनिकों और विद्वानों द्वारा भी मानव के अंदर पाँच विकार बताए गए हैं, जैसे कि काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार। उन्होंने भी इन पाँच विकारों में से अहंकार (अभिमान) को सबसे बड़ा दर्जा […]

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April 10, 2025
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प्रेम और ममता की घनी छाँव : माता खीवी जी

– डॉ. राजेंद्र सिंघ साहिल किसी समाज का विकास इस बात पर निर्भर करता है कि उस समाज में, उस समाज के क्रिया कलाप में स्त्रियों की क्या भूमिका है। गुरमति विचारधारा को प्रफुल्लित एवं स्थापित करने में अनेक कर्मठ एवं समर्पित स्त्रियों का योगदान रहा है। गुरु साहिबान, अद्वितीय सिक्खों एवं शहीद सिंघों के […]

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April 03, 2025
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एक सैलानी की दृष्टि में श्री अनंदपुर साहिब

– डॉ. राजेंद्र सिंघ साहिल धर्मों के संदर्भ में अक्सर यह देखने में आया है कि कुछ स्थान ऐसे होते हैं जो अपनी विशेष और महत्त्वपूर्ण स्थिति के कारण उस धर्म-विशेष के केंद्रीय स्थान के रूप में विकसित हो जाते हैं। ये स्थान उस धर्म के महापुरुषों, पैगंबरों, गुरु साहिबान, भक्त साहिबान आदि के साधन […]

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April 03, 2025
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गुरबाणी में दर्ज सृष्टि-रचना का विधान

-डॉ. रछपाल सिंघ गुरबाणी सर्वकालीन सदीवी सच है । यह ‘धुर की बाणी’ है अथवा अकाल पुरख जी का ‘अगंमी हुक्म’ है। गुरबाणी में मानव जीवन से संबंधित सभी प्रकार की सामग्री उपलब्ध है। गुरबाणी आधुनिक वैज्ञानिक युग अथवा खोजों का आधार है। इसमें बहुत-सी सामग्री वैज्ञानिक पक्ष से संबंधित है। वैज्ञानिक खोज इस समय […]

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April 03, 2025
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गुरमति दृष्टिकोण के अनुसार जीवन – आदर्श की महत्ता

– डॉ. शमशेर सिंघ सिक्ख गुरुओं द्वारा दर्शाए जीवन – मार्ग को गुरमति विचारधारा के अनुसार ‘निर्मल पंथ’, ‘खालसा पंथ के नाम दिये गए हैं। इन शब्दों का आंतरिक भाव एक ही ख़्याल का सूचक है जो गुरु साहिबान ने संसार के कल्याण के लिए दिया है। महापुरुष का जीवन एवं कर्त्तव्य एक ऐसी नदी […]

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April 03, 2025
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भारतीय सेना-सिक्ख रेजिमेंट

स. जसविंदर सिंघ खांबरा   सेवा मुक्त मेजर जनरल मुकशी खान ने अपनी पुस्तक, ‘क्राईस ऑफ लीडरशिप’ में लिखा है कि भारतीय सेना का एक अभिन्न अंग होते हुए भी भारतीय सेना सिक्खों के शौर्य से अनजान ही रही क्योंकि घर की मुर्गी दाल बराबर ।   भारतीय सेना को सिक्खों की वीरता से कभी […]

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March 24, 2025
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‘सिंह’ नहीं ‘सिंघ’ लिखें

– प्रो. सुरिंदर कौर सिक्ख धर्म विश्व का सबसे आधुनिक धर्म है, जिसकी स्थापना केवल ५५४ वर्ष पूर्व ही हुई है । अन्य धर्मों के प्रचार व प्रसार से कहीं आगे इतने अल्प समय में भी सिक्ख धर्म आज विश्वव्यापी है। अपने आरंभ के काल से ही सिक्ख धर्म को राजनैतिक, सामाजिक व धार्मिक विरोधों […]