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February 03, 2025
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श्री गुरु ग्रंथ साहिब में गुरु-महिमा का संदेश

-डॉ नवरत्न कपूर* गुरु : साक्षात परमेश्वर : श्री गुरु ग्रंथ साहिब में गुरु के लिए ‘गुर’ और ‘सतिगुरु’ का प्रयोग अनेक बार हुआ है। ‘गुरु’ वस्तुतः ‘गुरु’ संस्कृत वाचक शब्द ही है और संस्कृत शब्द ‘सद्गुरु’ का रूपांतरित अपभ्रंश रूप ‘सतिगुरु’ है। श्री गुरु अरजन देव जी ने ‘गुरु’ को साक्षात भगवान का स्वरूप […]

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February 03, 2025
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श्री गुरु तेग बहादर साहिब का चरण – स्पर्श प्राप्त गुरुद्वारा कोठा साहिब, वल्ला

– स. बिक्रमजीत सिंघ* सिक्ख गुरु साहिबान ने अपने-अपने जीवन काल के दौरान जहां-जहां भी चरण डाले वह धरती सर्वदा के लिए सौभाग्यवान हो गई। जंगली एवं वीरान इलाके पावन धार्मिक स्थान बनने के साथ-साथ शहरों, कसबों आदि में तबदील हो गए। बंज़र ज़मीनें पुनः हरियाली से ओत-प्रोत होकर समूची मानवता के लिए वरदान बन […]

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February 03, 2025
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बड़ा घल्लूघारा

‘घल्लूघारा’ शब्द का सम्बंध अफगानी भाषा के साथ है । ‘घल्लूघारा’ का मतलब है– सब कुछ बर्बाद हो जाना। मुगल बादशाह अहमदशाह अब्दाली २० वर्ष की आयु में बादशाह बन गया था । उसने भारत पर दस बार आक्रमण किया। वह अपने जासूसों को तंबाकू आदि का व्यापार करने के बहाने भारत भेजता, जो भारत आकर यहां का सारा भेद ले जाते। इन्हीं जासूसों के द्वारा ही बहुत सारे भारतीयों को तंबाकू की त लग गई। उसने सन् १७६२ ई में जो आक्रमण भारत पर किया, उसका मुख्य उद्देश्य सिक्खों की शक्ति को नष्ट करना था। अब्दाली के सिक्खों पर किए गए इस आक्रमण को सिक्ख इतिहास में ‘बड़ा घल्लूघारा’ के नाम से याद किया जाता है। यह अब्दाली का छठा आक्रमण था । अहमदशाह अब्दाली अपने २२०० सैनिकों के साथ जनवरी, १७६२ ई में रोहतास के मार्ग से भारत में दाखिल हुआ। अब्दाली और उसके सैनिकों के हौसले बुलंद थे क्योंकि इससे पहले जनवरी १७६१ ई में अब्दाली ने मराठों को पानीपत की तीसरी लड़ाई में कम- तोड़ पराजय दी थी ।

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January 30, 2025
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दसतार का सम्मान

श्री रणवीर सिंह मांदी* श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी ने ‘खालसा’ की सृजना करते समय पांच ककारों को धारण करने की परंपरा आरंभ की थी। उनमें एक ककार है केश । केशों की संभाल एवं अन्य हिफाजत के लिए दसतार अनिवार्य होती है । दसतार आदमी की आन-बान-शान है । दसतार न केवल सिक्ख की […]

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January 30, 2025
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आत्म गौरव की रक्षा

मानव जीवन अपने आप में एक अमूल्य उपहार हैं । जीवन सर्वोत्तम उत्कृष्टता के साथ जीने से सार्थक व सफल होता है । सब में परमात्मा के स्वरूप के दर्शन कर, मानवता की रक्षा, मानव मूल्यों हेतु हम अपने को सदा आगे रखें। सिक्ख गुरु साहिबान ने अपने व्यक्तिगत सुख व आकांक्षाओं को छोड़कर दूसरों के कल्याण हेतु संघर्ष किया, ज़रूरत पड़ी तो बलिदान देने में भी पीछे नहीं हटे, तभी वे समाज में सर्वोत्तम आदर्श व पूज्य व्यक्तित्व बन गए ।
माया का लोभ, भ्रांतियों और रूढ़ियों में जकड़े रहना, रोग-शोक का कारण हैं । हम आत्म सुधार कर अपनी मलीनताओं को दूर कर परिष्कृत व उदार सेवाभावी बनें। आत्म सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है। जो भी अपूर्णताएं हैं, उन्हें अध्यात्म का सहारा लेकर दूर करने का प्रयास करें। जीवन में कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे सिर झुकाना पड़े; कहीं अपमान सहना पड़े या कोई हमारी आलोचना करे। हम सही नीति पर चलते हुए श्रेष्ठ कार्य करें और समाज को ऊंचा उठाने में भरपूर योगदान दें।

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January 30, 2025
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मानवता के हमदर्द : भक्त रविदास जी

– डॉ. दिलप्रीत कौर * विख्यात संतों एवं भक्तों में भक्त रविदास जी का नाम बड़ी श्रद्धा से लिया जाता है । आ जन्म संवत् १४३३ बिक्रमी में श्री राघव (रघु) के घर बनारस (वाराणसी) में हुआ था। आपके जन्म संबंधी यह दोहा प्रचलित है: संवत चौदह सौ तैंतीस, माघ सुदी पंद्रास । दुखियों के […]

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January 30, 2025
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गुरबाणी अनुसार सुखी जीवन की प्राप्ति

– डॉ. बेअंत सिंघ शीतल* संसार के प्रत्येक मनुष्य की हार्दिक अभिलाषा होती है कि वह हमेशा आनंद से भरपूर सुखी जीवन व्यतीत करे। इस निश्चिंततापूर्वक प्रसन्न एवं सुखी जीवन के लिए परम आवश्यक है मानसिक शांति तथा शारीरिक आरोग्यता । इन्हीं की प्राप्ति के लिए गुरबाणी में अत्यंत प्रमाण मौजूद हैं : दुखु दरदु […]

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January 10, 2025
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सुपने जिउ संसारु ॥

– स. रणवीर सिंह* रामु गइओ रावनु गइओ जा कउ बहु परवारु ॥ कहु नानक थिरु कछु नही सुपने जिउ संसारु ॥ ( पन्ना १४२९) नवम् पातशाह श्री गुरु तेग बहादर साहिब ने फरमाया है कि जिसने भी इस धरती पर जन्म लिया है, उसे मरना जरूर है। इस सृष्टि में कोई भी स्थिर नहीं […]

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January 10, 2025
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बाबा दीप सिंघ जी शहीद

-डॉ. कशमीर सिंघ ‘नूर’* विश्व-इतिहास में अलग, उच्च कोटि का और अति महत्त्वपूर्ण व गौरवपूर्ण स्थान रखने वाले सिक्ख- इतिहास का प्रत्येक अध्याय शहीदों के खून की आभा से चमकता – दमकता दिखाई देता है। सिक्ख गुरुओं, शूरवीरों, योद्धाओं, सिंघों, सिंघनियों, भुजंगियों की शहादत की लौ से, प्रकाश से संसार में से तमाम बुराइयों के […]

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January 10, 2025
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संगीत – क्षेत्र में गुरमति संगीत का स्थान

-डॉ. प्रेम मच्छाल * सिक्ख धर्म में गुरु साहिबान की बाणी को ‘गुरबाणी’, जहां गुरबाणी – संग्रह श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश हो उसको ‘गुरुद्वारा’ और उनके उद्देश्यों और उपदेशों को ‘गुरमति’ (गुरु की मति ) कहने के कारण भारतीय संगीत के जो सप्त स्वर सिक्ख धर्म की आस्था और विश्वास को उज्जवल ( […]