बाबा दीप सिंघ जी शहीद
-डॉ. कशमीर सिंघ ‘नूर’* विश्व-इतिहास में अलग, उच्च कोटि का और अति महत्त्वपूर्ण व गौरवपूर्ण स्थान रखने वाले सिक्ख- इतिहास का प्रत्येक अध्याय शहीदों के खून की आभा से चमकता – दमकता दिखाई देता है। सिक्ख गुरुओं, शूरवीरों, योद्धाओं, सिंघों, सिंघनियों, भुजंगियों की शहादत की लौ से, प्रकाश से संसार में से तमाम बुराइयों के […]
छाइ जाती एकता, अनेकता बिलाइ जाती
– सतविंदर सिंघ फूलपुर परमात्मा ने सृष्टि बना कर कई तरीके से, अनेक रंगों और किस्मों की रचना की है। असंख्य प्रकार के जीव-जंतु, मानव, वनस्पतियां, फूल- फल आदि पैदा किये हैं। यह विभिन्नता ही प्रकृति की सुन्दरता है। एकसारता एकरूपता (सदृश) में मायूसी है। अनेकता (बहुरूपता, विभिन्नता, नानात्व) धरती का सौंदर्य है। मात्र जल, […]
सिक्ख चिंतन
सिक्ख चिंतन : सर्वधर्म समभाव की दृष्टि -डॉ. महीप सिंघ* सम्पूर्ण सिक्ख चिंतन का आधार श्री गुरु ग्रंथ साहिब हैं। यह पावन ग्रंथ सर्वधर्म समभाव का एक अद्भुत उदाहरण है। संसार के सभी धर्म-ग्रंथों में जो संदेश और उपदेश संगृहीत हैं उनमें मानव मात्र के कल्याण, व्याधियों से मुक्ति और प्रभु – मिलन की कामना […]
तख़्त श्री हरिमंदर जी पटना साहिब से सम्बंधित एक अहम पंथक दस्तावेज
– स. गुरचरनजीत सिंघ (लांबा) “गंगा में से उठी लहर गोदावरी में समाई।” ये शब्द कलगीधर पिता साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी के जीवन काल के सफ़र को बयान करते हैं। गंगा तट के कदीमी शहर पटना साहिब में सतिगुरु जी का प्रकाश हुआ और गोदावरी के तट पर श्री हजूर साहिब में ज्योति जोत समाए । पंजाब में सतलुज के किनारे आपका कर्म क्षेत्र रहा।
