हिन्दी, ਲੇਖ
January 10, 2025
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सुपने जिउ संसारु ॥

– स. रणवीर सिंह* रामु गइओ रावनु गइओ जा कउ बहु परवारु ॥ कहु नानक थिरु कछु नही सुपने जिउ संसारु ॥ ( पन्ना १४२९) नवम् पातशाह श्री गुरु तेग बहादर साहिब ने फरमाया है कि जिसने भी इस धरती पर जन्म लिया है, उसे मरना जरूर है। इस सृष्टि में कोई भी स्थिर नहीं […]

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January 10, 2025
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बाबा दीप सिंघ जी शहीद

-डॉ. कशमीर सिंघ ‘नूर’* विश्व-इतिहास में अलग, उच्च कोटि का और अति महत्त्वपूर्ण व गौरवपूर्ण स्थान रखने वाले सिक्ख- इतिहास का प्रत्येक अध्याय शहीदों के खून की आभा से चमकता – दमकता दिखाई देता है। सिक्ख गुरुओं, शूरवीरों, योद्धाओं, सिंघों, सिंघनियों, भुजंगियों की शहादत की लौ से, प्रकाश से संसार में से तमाम बुराइयों के […]

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January 10, 2025
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संगीत – क्षेत्र में गुरमति संगीत का स्थान

-डॉ. प्रेम मच्छाल * सिक्ख धर्म में गुरु साहिबान की बाणी को ‘गुरबाणी’, जहां गुरबाणी – संग्रह श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश हो उसको ‘गुरुद्वारा’ और उनके उद्देश्यों और उपदेशों को ‘गुरमति’ (गुरु की मति ) कहने के कारण भारतीय संगीत के जो सप्त स्वर सिक्ख धर्म की आस्था और विश्वास को उज्जवल ( […]

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January 07, 2025
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छाइ जाती एकता, अनेकता बिलाइ जाती

– सतविंदर सिंघ फूलपुर परमात्मा ने सृष्टि बना कर कई तरीके से, अनेक रंगों और किस्मों की रचना की है। असंख्य प्रकार के जीव-जंतु, मानव, वनस्पतियां, फूल- फल आदि पैदा किये हैं। यह विभिन्नता ही प्रकृति की सुन्दरता है। एकसारता एकरूपता (सदृश) में मायूसी है। अनेकता (बहुरूपता, विभिन्नता, नानात्व) धरती का सौंदर्य है। मात्र जल, […]

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January 07, 2025
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गुरमति में दान और दसवंध का महत्व

– डॉ. कशमीर सिंघ ‘नूर’* भाई कान्ह सिंघ नाभा के मुताबिक दान का अर्थ है- देने का कर्म देने योग्य धन । वह वस्तु जो दान में दी गई हो तथा महसूल, कर आदि अर्थों में भी ‘दान’ शब्द का उपयोग हुआ मिलता है। गुरबाणी का कथन है : — हउमै डंनु सहै राजा मंगै […]

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January 07, 2025
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श्री गुरु हरिराय साहिब

– प्रिं: तेजा सिंघ, डॉ. गंडा सिंघ श्री गुरु हरिगोबिंद साहिब के बाबा गुरदित्ता जी, सूरज मल, अणी राय, बाबा अटल राय तथा श्री (गुरु) तेग बहादर साहिब पांच सुपुत्र थे । बाबा अटल राय, अणी राय तथा बाबा गुरदित्ता जी अपने पिता जी के जीते-जी ही परलोक गमन कर गये थे। सूरज मल सांसारिक […]

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January 07, 2025
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सिक्ख इतिहास में पटना साहिब का स्थान

-डॉ. दीनानाथ शरण सिक्खों के इतिहास में पटना साहिब का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पटना साहिब में दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी का जन्म हुआ; यहीं उनके बचपन के छः सात वर्ष व्यतीत हुए। पटना साहिब को श्री गुरु नानक देव जी का चरण स्पर्श भी प्राप्त है। श्री गुरु तेग बहादर […]

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January 07, 2025
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सिक्ख चिंतन

सिक्ख चिंतन : सर्वधर्म समभाव की दृष्टि -डॉ. महीप सिंघ* सम्पूर्ण सिक्ख चिंतन का आधार श्री गुरु ग्रंथ साहिब हैं। यह पावन ग्रंथ सर्वधर्म समभाव का एक अद्भुत उदाहरण है। संसार के सभी धर्म-ग्रंथों में जो संदेश और उपदेश संगृहीत हैं उनमें मानव मात्र के कल्याण, व्याधियों से मुक्ति और प्रभु – मिलन की कामना […]

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January 01, 2025
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बच्चों को सिखाएं सिक्ख मार्शल आर्ट गतका

-स. गुरप्रीत सिंघ आज की जीवन-शैली में जहाँ हम गलत जीवन- जाच के कारण बीमारियों से पीड़ित हैं, वहीं हमारे बच्चे भी बीमारियाँ से अछूते नहीं रहे। बच्चों में भी बढ़ती बीमारियाँ बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं। बीमारियाँ शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की हैं। आश्चर्य की बात है कि मानसिक तनाव का […]

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January 01, 2025
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तख़्त श्री हरिमंदर जी पटना साहिब से सम्बंधित एक अहम पंथक दस्तावेज

– स. गुरचरनजीत सिंघ (लांबा) “गंगा में से उठी लहर गोदावरी में समाई।” ये शब्द कलगीधर पिता साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी के जीवन काल के सफ़र को बयान करते हैं। गंगा तट के कदीमी शहर पटना साहिब में सतिगुरु जी का प्रकाश हुआ और गोदावरी के तट पर श्री हजूर साहिब में ज्योति जोत समाए । पंजाब में सतलुज के किनारे आपका कर्म क्षेत्र रहा।