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January 07, 2025
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गुरमति में दान और दसवंध का महत्व

– डॉ. कशमीर सिंघ ‘नूर’* भाई कान्ह सिंघ नाभा के मुताबिक दान का अर्थ है- देने का कर्म देने योग्य धन । वह वस्तु जो दान में दी गई हो तथा महसूल, कर आदि अर्थों में भी ‘दान’ शब्द का उपयोग हुआ मिलता है। गुरबाणी का कथन है : — हउमै डंनु सहै राजा मंगै […]

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January 07, 2025
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छाइ जाती एकता, अनेकता बिलाइ जाती

– सतविंदर सिंघ फूलपुर परमात्मा ने सृष्टि बना कर कई तरीके से, अनेक रंगों और किस्मों की रचना की है। असंख्य प्रकार के जीव-जंतु, मानव, वनस्पतियां, फूल- फल आदि पैदा किये हैं। यह विभिन्नता ही प्रकृति की सुन्दरता है। एकसारता एकरूपता (सदृश) में मायूसी है। अनेकता (बहुरूपता, विभिन्नता, नानात्व) धरती का सौंदर्य है। मात्र जल, […]

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January 07, 2025
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श्री गुरु हरिराय साहिब

– प्रिं: तेजा सिंघ, डॉ. गंडा सिंघ श्री गुरु हरिगोबिंद साहिब के बाबा गुरदित्ता जी, सूरज मल, अणी राय, बाबा अटल राय तथा श्री (गुरु) तेग बहादर साहिब पांच सुपुत्र थे । बाबा अटल राय, अणी राय तथा बाबा गुरदित्ता जी अपने पिता जी के जीते-जी ही परलोक गमन कर गये थे। सूरज मल सांसारिक […]

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January 07, 2025
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सिक्ख इतिहास में पटना साहिब का स्थान

-डॉ. दीनानाथ शरण सिक्खों के इतिहास में पटना साहिब का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पटना साहिब में दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी का जन्म हुआ; यहीं उनके बचपन के छः सात वर्ष व्यतीत हुए। पटना साहिब को श्री गुरु नानक देव जी का चरण स्पर्श भी प्राप्त है। श्री गुरु तेग बहादर […]

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January 07, 2025
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सिक्ख चिंतन

सिक्ख चिंतन : सर्वधर्म समभाव की दृष्टि -डॉ. महीप सिंघ* सम्पूर्ण सिक्ख चिंतन का आधार श्री गुरु ग्रंथ साहिब हैं। यह पावन ग्रंथ सर्वधर्म समभाव का एक अद्भुत उदाहरण है। संसार के सभी धर्म-ग्रंथों में जो संदेश और उपदेश संगृहीत हैं उनमें मानव मात्र के कल्याण, व्याधियों से मुक्ति और प्रभु – मिलन की कामना […]

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January 01, 2025
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शहादत का स्रोत

–  गुरुचरनजीत सिंह लांबा रिहा गिट्ठां नाल पुत्तां दीआं मिणे पिन्नीआं चोजी अक्खां साहवें नक्शा दीवार दा रिहा । (कुंदन) कलगीधर पिता साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी के लखते-जिगर चार साहिबज़ादों की शहादत मानवता के इतिहास में अद्वितीय है। संसार के किसी हिस्से में इसका कोई सानी नहीं मिलता। बड़े साहिबजादों का चमकौर साहिब […]

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January 01, 2025
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वातावरण की अशुद्धता

वातावरण की अशुद्धता : समस्या और समाधान – डॉ. इंदरजीत सिंघ ‘वासु’* मानव प्रकृति का गौरव और विशेष चमत्कार है, जो लाखों वर्षों से प्रकृति के संग सफ़र कर रहा है। व्याकुलता और तलाश की प्राथमिक रुचियों के कारण मानव इसके खजानों की खोज के प्रति समर्पित रहा है। आज के युग में पहुँच कर […]

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January 01, 2025
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बच्चों को सिखाएं सिक्ख मार्शल आर्ट गतका

-स. गुरप्रीत सिंघ आज की जीवन-शैली में जहाँ हम गलत जीवन- जाच के कारण बीमारियों से पीड़ित हैं, वहीं हमारे बच्चे भी बीमारियाँ से अछूते नहीं रहे। बच्चों में भी बढ़ती बीमारियाँ बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं। बीमारियाँ शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की हैं। आश्चर्य की बात है कि मानसिक तनाव का […]

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January 01, 2025
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तख़्त श्री हरिमंदर जी पटना साहिब से सम्बंधित एक अहम पंथक दस्तावेज

– स. गुरचरनजीत सिंघ (लांबा) “गंगा में से उठी लहर गोदावरी में समाई।” ये शब्द कलगीधर पिता साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी के जीवन काल के सफ़र को बयान करते हैं। गंगा तट के कदीमी शहर पटना साहिब में सतिगुरु जी का प्रकाश हुआ और गोदावरी के तट पर श्री हजूर साहिब में ज्योति जोत समाए । पंजाब में सतलुज के किनारे आपका कर्म क्षेत्र रहा।