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February 10, 2026
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डिठे सभे थाव नही तुधु जेहिआ

डिठे सभे थाव नही तुधु जेहिआ॥ बधोहु पुरखि बिधातै तां तू सोहिआ ॥ वसदी सघन अपार अनूप रामदास पुर ॥ हरिहां नानक कसमल जाहि नाइऐ रामदास सर ॥ (अंग १३६२) पंचम सतिगुरु श्री गुरू अरजन देव जी श्री गुरू ग्रंथ साहिब में ‘फुनहे महला ५’ के शीर्षक तले अंकित इस पावन शब्द में आत्मिक स्नान […]

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February 07, 2026
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सेवा

सेवा से तात्पर्य है कि कोई भी काम निःशुल्क रूप में करना, जिससे व्यक्ति को मानसिक संतुष्टि हो, जिसमें परोपकार की भावना हो, जिससे अपना और दूसरों का भला हो। वास्तव में सेवा एक साधना मार्ग है, जिसमें अपनी मानसिक प्रसन्नता के साथ-साथ मानवता के भले की बात होती है। सांसारिक स्तर पर उपजीविका कमाने […]

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February 04, 2026
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बनसपति मउली चड़िआ बसंतु

गुरबाणी में दिन, वार, तिथियां, ऋतुएं, महीनों का जिक्र आया है तथा इनके माध्यम से मनुष्य को आत्मिक ज्ञान प्रदान किया गया है। यहां कुदरत का वर्णन किसी प्रकार की सगुण पूजा नहीं है बल्कि कुदरत में कादर का जलवा देखकर मनुष्य की अंदरूनी विस्माद अवस्था का निरूपण किया गया है। कुदरत का आनंद मन […]

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February 03, 2026
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आगमन दिवस, 1 फरवरी को विशेष : भक्त रविदास जी की विचारधारा

श्री गुरु ग्रंथ साहिब विश्व के धार्मिक एवं साहित्यिक ग्रंथों में विशेष महत्त्वपूर्ण है। इसमें विभिन्न बाणीकारों की बाणी है जो कि ३१ रागों पर आधारित है। यह बाणी आध्यात्मिक गुणों का ही नहीं मानवीय गुणों का भी बखान करती है। भक्त रविदास जी इन बाणीकारों में से एक हैं। भक्त रविदास जी के श्री […]

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January 30, 2026
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31जनवरी को “प्रकाश पर्व पर विशेष” श्री गुरु हरिराय साहिब

श्री गुरु हरिगोबिंद साहिब के बाबा गुरदित्ता जी, सूरज मल, अणी राय, बाबा अटल राय तथा श्री (गुरु) तेग बहादर साहिब पांच सुपुत्र थे। बाबा अटल राय, अणी राय तथा बाबा गुरदित्ता जी अपने पिता जी के जीते-जी ही परलोक गमन कर गये थे। सूरज मल सांसारिक मामलों में जरूरत से ज्यादा खचित रहने वाला […]

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January 25, 2026
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गुरुद्वारा

श्री गुरु नानक देव जी के समय एवं उनसे कुछ समय बाद भी जहां ‘संगत’ तथा सत्य की विचार करने वाले सिक्ख गुरु के पास बैठकर तत्ववेत्ता एवं ज्ञाता बनते थे उस पवित्र स्थान को ‘धरमसाल’ (धर्मशाला) कहते थे। गुरु नानक पातशाह ने गुरसिक्खी की मूल बाणी ‘जपु’ के शिखर पर पहुंच कर ‘धरमसाल’ की […]

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January 22, 2026
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साचे नाम की लागै भूख

अनगिनत भूखों का मजमूआ (संग्रह) मानव शरीर है। फिर सारा जीवन उन भूखों को तृप्त करने में लग जाता है। जब एक भूख की पूर्ति होती है तो कई-कई भूखें जन्म ले लेती हैं और इन भूखों में ही एक दिन जीवन का अंत हो जाता है। पदार्थ का सारा रस भूख में ही छिपा […]

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January 07, 2026
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जाति महि जोति जोति महि जाता

आत्मा और परमात्मा क्योंकि समान रूप से अदृश्य वायबी हैं और आत्मा क्योंकि ब्रह्म ऊर्जा का एक अंश ही है, इसलिए आत्मा की पहचान होते ही परम-आत्मा की पहचान का रास्ता प्रशस्त हो जाता है। जिस प्रकार आत्मा रूपी लघु अदृश्य तत्त्व के शरीर में रहने से ही शरीर चलता है, पैदा होता है, बड़ा […]

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December 31, 2025
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दिव्यता

ज्ञान ही दिव्यता है, जिसे प्रकृति ने प्रत्येक प्राणी को दे रखा है। एक व्यक्ति ‘पढ़ा-लिखा’ होता है, एक ‘पढ़ा-गुणा’ होता है। ‘पढ़ा-लिखा’ व्यक्ति लिखना-पढ़ना जानता है, इससे आगे वह नहीं बढ़ता, लेकिन ‘पढ़ा-गुणा’ अपने पढ़े हुए को, अपनी जानकारी को, अपने विवेक के साथ गुणा कर लेता है तो जानकारी ज्ञान में परिवर्तित हो […]

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December 29, 2025
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सुखमनी साहिब की सार्थकता, उपलब्धि और मनुष्य-जीवन में इसकी उपयोगिता

श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संपादन करने वाले सिक्ख मत के पंचम गुरु श्री गुरु अरजन देव जी का जन्म १५ अप्रैल, १५६३ ई को गोइंदवाल साहिब, जिला तरनतारन में हुआ। आपके पिता जी का नाम श्री गुरु रामदास जी और माता का नाम माता भानी जी था। आपको फारसी, संस्कृत, पंजाबी और ब्रज भाषा […]