चढ़दी कला का प्रतीक : होला महल्ला
-डॉ. कुलदीप सिंघ हउरा* किसी विद्वान का कथन है, “जो कौम मरना जानती है, उसको जीने का लालच नहीं होता । उस कौम को विश्वास होता है। : मरणु मुसा सूरिआ हकु है जो होइ मरनि परवाणो ॥ ( पन्ना ५७९) यह श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी द्वारा बताई हुई मरने की युक्ति ही थी, […]
