गुरबाणी विचार : चेति गोविंदु अराधीऐ
चेति गोविंदु अराधीऐ होवै अनंदु घणा ॥ संत जना मिलि पाईऐ रसना नामु भणा ॥ जिनि पाइआ प्रभु आपणा आए तिसहि गणा ॥ इकु खितिसु बिनु जीवणा बिरथा जनमु जणा ॥ जलि थलि महीअलि पूरिआ रविआ विचि वणा ॥ प्रभु चिति न आवई कितड़ा दुखु गणा ॥ सो प्रभु जिनी राविआ सो प्रभू तिंना भागु […]
