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February 13, 2025
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गुरबाणी विचार फलगुणि श्री गुरु अरजन देव जी

गुरबाणी विचार फलगुणि अनंद उपारजना हरि सजण प्रगटे आइ || संत साई राम के करि किरपा दीआ मिलाइ ॥ सेज सहावी सरब सुख हुणि दुखा नाही जाइ ॥ इछ पुनी वडभागणी वरु पाइआ हरि राई || मिलि सहीआ मंगलु गावही गीत गोविंद अलाइ ॥ हरि जेहा अवरु न दिसई कोई दूजा लवै न लाइ ॥ […]

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February 12, 2025
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समाज-सुधार में क्रांति लाने वाले भक्त रविदास जी

-डॉ. कशमीर सिंघ ‘नूर’ जिस समाज में तथाकथित ऊंची जाति के लोगों द्वारा अन्य लोगों के साथ अमानवीय, अति घटिया, पशुओं के तुल्य व्यवहार सदियों तक किया जाता रहा हो, उस समाज में भक्त रविदास जी के जन्म लेने की घटना अत्यंत महत्त्वपूर्ण तथा क्रांतिकारी घटना थी । भक्त रविदास जी ऐसे महान भक्त, महान […]

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February 12, 2025
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उन सतिगुरु आगै सीसु न बेचिआ

-डॉ. परमजीत कौर जुल्म, जब्र और अन्याय को खत्म करने के लिए सरवंश कुर्बान कर देने वाले कलगीधर पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी ने श्री गुरु नानक देव जी द्वारा दिखाए गए सिद्धांतों के निर्माण के लिए और गुर विचारधारा को मज़बूत आधार देने के लिए गुरसिक्खों को अमृत की अद्वितीय अनमोल रहमत के […]

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February 12, 2025
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शहीद सरदार शाम सिंघ अटारी

– डॉ. कशमीर सिंघ ‘नूर’ सरदार शाम सिंघ अटारी का जन्म कब हुआ तथा इनका बचपन किस रूप में गुज़रा, इस बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चलता। डॉ. चोपड़ा ने अपनी पुस्तक ‘Punjab As A Sovereign State’ में लिखा है कि “स. शाम सिंघ पहली बार सन् १८१८ ई. में महाराजा रणजीत सिंघ की […]

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February 12, 2025
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कहि रविदास छूटिबो कवन गुन

– डॉ. सत्येंद्रपाल सिंघ भक्त रविदास जी सामाजिक-आध्यात्मिक यथार्थ के बड़े सशक्त पैरोकार और प्रवक्ता थे, जिन्होंने तमाम दबावों और विरोधाभासों के बावजूद भी सच कहने का साहस दिखाया । कदाचित इसी कारण उनकी बाणी को श्री गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान मिला । सच के जिस धरातल को तलाश कर गुरु साहिबान ने समाज […]

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February 03, 2025
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भ्रष्टाचार : कारण और निवारण

-डॉ. दादूराम शर्मा* अर्थ या धन मानव जीवन का आधार है । हमारे मनीषियों ने प्राचीन काल में जिन चार पुरुषार्थों की स्थापना की थी, वे हैं– धर्म अर्थ, काम और मोक्ष । विज्ञान के इस युग ने धर्म और मोक्ष की मान्यताओं को पूरी तरह नकार दिया है अथवा संदेह के घेरे में लाकर […]

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February 03, 2025
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श्री गुरु ग्रंथ साहिब में गुरु-महिमा का संदेश

-डॉ नवरत्न कपूर* गुरु : साक्षात परमेश्वर : श्री गुरु ग्रंथ साहिब में गुरु के लिए ‘गुर’ और ‘सतिगुरु’ का प्रयोग अनेक बार हुआ है। ‘गुरु’ वस्तुतः ‘गुरु’ संस्कृत वाचक शब्द ही है और संस्कृत शब्द ‘सद्गुरु’ का रूपांतरित अपभ्रंश रूप ‘सतिगुरु’ है। श्री गुरु अरजन देव जी ने ‘गुरु’ को साक्षात भगवान का स्वरूप […]

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February 03, 2025
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श्री गुरु तेग बहादर साहिब का चरण – स्पर्श प्राप्त गुरुद्वारा कोठा साहिब, वल्ला

– स. बिक्रमजीत सिंघ* सिक्ख गुरु साहिबान ने अपने-अपने जीवन काल के दौरान जहां-जहां भी चरण डाले वह धरती सर्वदा के लिए सौभाग्यवान हो गई। जंगली एवं वीरान इलाके पावन धार्मिक स्थान बनने के साथ-साथ शहरों, कसबों आदि में तबदील हो गए। बंज़र ज़मीनें पुनः हरियाली से ओत-प्रोत होकर समूची मानवता के लिए वरदान बन […]

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February 03, 2025
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बड़ा घल्लूघारा

‘घल्लूघारा’ शब्द का सम्बंध अफगानी भाषा के साथ है । ‘घल्लूघारा’ का मतलब है– सब कुछ बर्बाद हो जाना। मुगल बादशाह अहमदशाह अब्दाली २० वर्ष की आयु में बादशाह बन गया था । उसने भारत पर दस बार आक्रमण किया। वह अपने जासूसों को तंबाकू आदि का व्यापार करने के बहाने भारत भेजता, जो भारत आकर यहां का सारा भेद ले जाते। इन्हीं जासूसों के द्वारा ही बहुत सारे भारतीयों को तंबाकू की त लग गई। उसने सन् १७६२ ई में जो आक्रमण भारत पर किया, उसका मुख्य उद्देश्य सिक्खों की शक्ति को नष्ट करना था। अब्दाली के सिक्खों पर किए गए इस आक्रमण को सिक्ख इतिहास में ‘बड़ा घल्लूघारा’ के नाम से याद किया जाता है। यह अब्दाली का छठा आक्रमण था । अहमदशाह अब्दाली अपने २२०० सैनिकों के साथ जनवरी, १७६२ ई में रोहतास के मार्ग से भारत में दाखिल हुआ। अब्दाली और उसके सैनिकों के हौसले बुलंद थे क्योंकि इससे पहले जनवरी १७६१ ई में अब्दाली ने मराठों को पानीपत की तीसरी लड़ाई में कम- तोड़ पराजय दी थी ।

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January 30, 2025
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दसतार का सम्मान

श्री रणवीर सिंह मांदी* श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी ने ‘खालसा’ की सृजना करते समय पांच ककारों को धारण करने की परंपरा आरंभ की थी। उनमें एक ककार है केश । केशों की संभाल एवं अन्य हिफाजत के लिए दसतार अनिवार्य होती है । दसतार आदमी की आन-बान-शान है । दसतार न केवल सिक्ख की […]