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April 03, 2025
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गुरमति दृष्टिकोण के अनुसार जीवन – आदर्श की महत्ता

– डॉ. शमशेर सिंघ सिक्ख गुरुओं द्वारा दर्शाए जीवन – मार्ग को गुरमति विचारधारा के अनुसार ‘निर्मल पंथ’, ‘खालसा पंथ के नाम दिये गए हैं। इन शब्दों का आंतरिक भाव एक ही ख़्याल का सूचक है जो गुरु साहिबान ने संसार के कल्याण के लिए दिया है। महापुरुष का जीवन एवं कर्त्तव्य एक ऐसी नदी […]

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April 03, 2025
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भारतीय सेना-सिक्ख रेजिमेंट

स. जसविंदर सिंघ खांबरा   सेवा मुक्त मेजर जनरल मुकशी खान ने अपनी पुस्तक, ‘क्राईस ऑफ लीडरशिप’ में लिखा है कि भारतीय सेना का एक अभिन्न अंग होते हुए भी भारतीय सेना सिक्खों के शौर्य से अनजान ही रही क्योंकि घर की मुर्गी दाल बराबर ।   भारतीय सेना को सिक्खों की वीरता से कभी […]

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March 24, 2025
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‘सिंह’ नहीं ‘सिंघ’ लिखें

– प्रो. सुरिंदर कौर सिक्ख धर्म विश्व का सबसे आधुनिक धर्म है, जिसकी स्थापना केवल ५५४ वर्ष पूर्व ही हुई है । अन्य धर्मों के प्रचार व प्रसार से कहीं आगे इतने अल्प समय में भी सिक्ख धर्म आज विश्वव्यापी है। अपने आरंभ के काल से ही सिक्ख धर्म को राजनैतिक, सामाजिक व धार्मिक विरोधों […]

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March 24, 2025
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सिक्ख मिसल काल की अद्वितीय धरोहर : बुंगा रामगढ़िया

-डॉ. कशमीर सिंघ ‘नूर’ ‘बुंगा’ शब्द का मूल स्रोत फारसी के ‘बुंगाह’ शब्द को माना जाता है। इसका भावार्थ होता है– निवास-स्थान या रहने का स्थान । आरंभ में श्री हरिमंदर साहिब श्री अमृतसर के इर्द-गिर्द लगभग ७० बुंगे बने हुए थे। ये बुंगे सिक्ख-मिसलों (जत्थेबंदियों) के प्रमुखों ने बनवाने शुरू किए थे। श्री हरिमंदर […]

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March 24, 2025
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वर्तमान समय में महिलाओं की दशा पर चिंतन व मनन

-डॉ. कशमीर सिंघ नूर महिलाओं के मान-सम्मान और कल्याण को मुख्य रखते हुए प्रत्येक वर्ष ८ मार्च को ‘ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ मनाया जाता है। आज के दौर में स्त्री को समाज में योग्य स्थान देने हेतु, उसका उत्पीड़न, शोषण रोकने हेतु, उसकी प्रगति के लिए संविधान में अनेक कानून बने हुए हैं, अनेक योजनाएं, […]

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March 24, 2025
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भाई सुबेग सिंघ – भाई शाहबाज सिंघ

– डॉ. मनजीत कौर  शहीदी परम्परा की एक और इबारत लिखने वाले महान शहीद, पिता-पुत्र भाई सुबेग सिंघ – भाई शाहबाज सिंघ थे, जिन्हें चरखड़ी पर चढ़ा कर शहीद कर दिया गया। उन्होंने जालिमों की धौंस स्वीकार नहीं की, अकाल-अकाल का उद्घोष करते हुए, चढ़दी कला में रहकर, असह कष्ट सहन करते हुए शहादत प्राप्त […]

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March 17, 2025
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चढ़दी कला का प्रतीक : होला महल्ला

-डॉ. कुलदीप सिंघ हउरा* किसी विद्वान का कथन है, “जो कौम मरना जानती है, उसको जीने का लालच नहीं होता । उस कौम को विश्वास होता है। : मरणु मुसा सूरिआ हकु है जो होइ मरनि परवाणो ॥ ( पन्ना ५७९) यह श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी द्वारा बताई हुई मरने की युक्ति ही थी, […]

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March 17, 2025
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अकाली फूला सिंघ जी शहीद

– स. गुरदीप सिंघ* अकाली फूला सिंघ जी महाराजा रणजीत सिंघ के सिरमौर जरनैलों में से थे। आपने सिक्ख राज्य की प्रफुल्लता के लिए तन, मन, धन एवं निष्काम भावना से सेवा की। आपने पंथक प्यार के अधीन सिक्ख राज्य की रक्षा के लिए अपना आप कुर्बान कर दिया । अकाली फूला सिंघ जी का […]

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March 17, 2025
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स. बघेल सिंघ करोड़ासिंघीया

-डॉ चमकौर सिंघ * सरदार बघेल सिंघ करोड़ासिंघीया मिसल के शक्तिशाली, फुर्तीले एवं सिरमौर सरदार हुए हैं, जिन्होंने सिक्खों की राजसी ताकत को गंग – दुआब (यू. पी.) तक बढ़ाया तथा दिल्ली के तख़्त को हिलाकर रख दिया। ज़िला श्री अमृतसर के गांव झबाल के ये शूरवीर सरदार करोड़ा सिंघ के बाद १७६१ ई में […]

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March 17, 2025
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होली कीनी संत सेव

– डॉ. सत्येंद्रपाल सिंघ* होली का त्योहार पुरातन काल से ही भारत में उत्सव की भांति मनाये जाने की परंपरा है। पौराणिक कथा है कि पिता हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र भक्त प्रहलाद को मार देने की आज्ञा दी थी जिसके लिए भक्त प्रहलाद की बुआ उसे अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठी थी । […]