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October 05, 2025
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महाराजा रणजीत सिंघ की पंथक सोच

सिक्ख कौम महाराजा रणजीत सिंघ पर फख्र करती है, क्योंकि वे पंजाब के ही नहीं बल्कि हिंद उप महाद्वीप के आखिरी स्वतंत्र, आज़ाद और खुदमुख्तार शासक थे, जिनकी कीर्ति पूरे संसार में फैली हुई थी। उन्होंने ऐसा सिक्ख राज (सत्ता) कायम किया, जिसमें तीन कौमें-सिक्ख, हिंदू और मुसलमान बराबर की हिस्सेदार थीं। उन्होंने गुरु-आशय के […]

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October 02, 2025
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गुर रामदास राखहु सरणाई

श्री गुरू रामदास जी दया व प्रेम की मूर्ति, नम्रता के पुंज, संगीत-कला व विद्या के प्रेमी के रूप में जाने जाते हैं। आप जी का समूचा जीवन गुरमति विचारधारा एवं सिख जीवन-शैली की अद्वितीय मिसाल है। भट्ट विद्वानों ने अपनी बाणी, जिसे ‘भट्टां दे सवैये’ के नाम से जाना जाता है, में गुरू साहिब […]

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September 03, 2025
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अरदास में केश दान का महत्त्व 

केशों की धर्म के इतिहास में विशेष महानता है। यह वो पहचान है जिससे प्रकृति ने हमें सजाया है। पैदा होते ही ये एक पोशाक की तरह परमात्मा ने हमें पहनाए हैं ।  ‘केश‘ शब्द का मूल धातु पाणिनी ने ‘काश’ बताया है, जिसका अर्थ है ‘ज्योति’ । इसलिए केश ज्योति को आकर्षित करने वाले […]

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August 25, 2025
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श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति सत्कार 

मानव मात्र के सर्वपक्षीय कल्याण हेतु अकाल पुरख परमात्मा की अपार कृपा से पंचम पातशाह श्री गुरु अरजन देव जी के महानतम संपादन के प्रयत्नों ने इस संसार के चिंतित लोगों को युग-युगांतर तक अटल रहने वाले और शबद – गुरु के रूप में सन् १६०४ ई. को लासानी ‘ग्रंथ साहिब’ का ईश्वरीय वरदान दिया, […]

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July 26, 2025
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सहयोग करें, उपकार नहीं

संसार परमात्मा की वैविध्य से परिपूर्ण रचना है। कोई शक्तिशाली, कोई निर्बल है। कोई धनवान, कोई निर्धन है। कोई ज्ञानवान है, कोई अज्ञानी है। अधिकांश धर्मग्रंथ इसे अपने कर्मों का फल मानते हैं। यह भी सत्य है कि परमात्मा दयालु है। सभी उसकी संतान हैं। अपनी संतान को कोई कैसे दुख में देख सकता है। […]

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July 18, 2025
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सिक्ख परंपरा में बाज़

बाज़ एक शिकारी पक्षी है, जिसे ‘जुर्रा की मादीन’ माना जाता है। पक्षियों की दुनिया में शक्ति और साहस का प्रतीक बाज़ चाहे अब पंजाब की धरती पर कम ही दिखाई देता है लेकिन फिर भी कहा जाता है कि सर्दियों की ॠतु में यह पंजाब की धरती पर चक्कर लगा ही जाता है और […]

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July 18, 2025
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हउमै दीरघ रोगु है दारू भी इसु माहि।।

गुरबाणी के शब्दों की व्याख्या करें तो गुरु साहिबान ने अभिमान (अहं, घमंड) को गंभीर रोग बताया है। हमारे भारतीय सभ्याचार में दार्शनिकों और विद्वानों द्वारा भी मानव के अंदर पाँच विकार बताए गए हैं, जैसे कि काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार। उन्होंने भी इन पाँच विकारों में से अहंकार (अभिमान) को सबसे बड़ा दर्जा […]

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April 10, 2025
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प्रेम और ममता की घनी छाँव : माता खीवी जी

– डॉ. राजेंद्र सिंघ साहिल किसी समाज का विकास इस बात पर निर्भर करता है कि उस समाज में, उस समाज के क्रिया कलाप में स्त्रियों की क्या भूमिका है। गुरमति विचारधारा को प्रफुल्लित एवं स्थापित करने में अनेक कर्मठ एवं समर्पित स्त्रियों का योगदान रहा है। गुरु साहिबान, अद्वितीय सिक्खों एवं शहीद सिंघों के […]

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April 03, 2025
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एक सैलानी की दृष्टि में श्री अनंदपुर साहिब

– डॉ. राजेंद्र सिंघ साहिल धर्मों के संदर्भ में अक्सर यह देखने में आया है कि कुछ स्थान ऐसे होते हैं जो अपनी विशेष और महत्त्वपूर्ण स्थिति के कारण उस धर्म-विशेष के केंद्रीय स्थान के रूप में विकसित हो जाते हैं। ये स्थान उस धर्म के महापुरुषों, पैगंबरों, गुरु साहिबान, भक्त साहिबान आदि के साधन […]

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April 03, 2025
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गुरबाणी में दर्ज सृष्टि-रचना का विधान

-डॉ. रछपाल सिंघ गुरबाणी सर्वकालीन सदीवी सच है । यह ‘धुर की बाणी’ है अथवा अकाल पुरख जी का ‘अगंमी हुक्म’ है। गुरबाणी में मानव जीवन से संबंधित सभी प्रकार की सामग्री उपलब्ध है। गुरबाणी आधुनिक वैज्ञानिक युग अथवा खोजों का आधार है। इसमें बहुत-सी सामग्री वैज्ञानिक पक्ष से संबंधित है। वैज्ञानिक खोज इस समय […]